जय जोहार संगवारी हो, मोर भुइयां में आप मन के स्वागत हे। संगवारी हो जमाना मोबाइल फ़ोन के आगे अउ किस्सा कहानी नन्दाये लागिस, आजकल के लइका मन ला किस्सा कहानी सुनाबे त मोबाइल ल मांगथे अउ कार्टून देखा कइथे फेर आजकल के सियान मन ल घलो किस्सा कहानी केहे बर नइ आय त लइका मन ल सुनाही त सुनाही कोन ? जब मै नान कन रेहेव त मोर डोकरी दाई ह मोला अब्बड़ अकन ले किस्सा कहानी सुनाये रिहिस फेर दिन निकल गे कुछ याद रहिगे अउ कुछ कुछ ल भुला घलो गे होहुँ कोशिश करहु जइसे के तइसे किस्सा ल सुना सकव तेकर से आप मन भी हमर छत्तीसगढ़ी किस्सा कहानी के आनंद ले पाहु, त चलव संगी आज आप मन ल सुनात हव हाथी अउ कोलिहा के मितानी के कहानी। हाथी अउ कोलिहा मितान बदिस। एक दिन के बात हे जब, "चल न मितान अब्बड़ दिन होंगे कोनो डाहर घूम आतेन यार" अइसे कहिके दोनों मितान सुनता बंधा के घूमे बर निकलिस। घुमत-घुमत दोनों मितान बड़ दुरिहा जंगल में पहुँच गे ताहन कोलिहा कइथे अब मोर से नइ रेंगावय मितान मै थक गेहव अउ भूखा घलो गेहव अब मोर से रेंगना नइ हो पाय। अपन मितान कोलिहा के बात ल सुन के ओकर दुःख तकलीफ़ ल देख के हाथी ल...